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भोजपुरी विवाह गीत :”एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला…”

भोजपुरी भाषा में इतनी मिठास है कि बड़ी-बड़ी बातें भी बेहद आसानी और छेड़छाड़ भरे अंदाज में कही जा सकती हैं। यही वजह है कि शादी-ब्याह के मौकों पर भोजपुरी विवाह गीत सुनकर हर कोई मुस्कुरा उठता है।

एक पारंपरिक ब्याह का गीत, जो खासतौर पर तब गाया जाता है जब बाराती मड़वा (मंडप) के पास पहुंचते हैं, सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। गीत की शुरुआती पंक्तियां इस प्रकार हैं:

“एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला…”

यह गीत समधी (ससुराल पक्ष) के कपड़ों पर हल्की-फुल्की चुटकी लेते हुए गाया जाता है। भोजपुरी की मीठी बोली में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होता है कि मजाक भी लगता है और रिश्तेदारी की मिठास भी बनी रहती है। बारातियों के स्वागत के दौरान महिलाएं यह गीत गाकर माहौल को और भी रंगीन बना देती हैं।

भोजपुरी संस्कृति में विवाह गीत (विवाह गारी या सोहर) की अपनी अलग पहचान है। इन गीतों में रिश्तेदारों के बीच हंसी-मजाक, घर की स्थितियों का जिक्र और शुभकामनाएं सब कुछ एक साथ बुन दिया जाता है। लोग कहते हैं कि भोजपुरी में गाली भी मीठी लगती है, तो ऐसे गीत तो दिल को छू ही लेते हैं।

पूरा गीत (पारंपरिक शैली में )

यह गीत मुख्य रूप से गारी शैली में है, जिसमें महिलाएं बारातियों को चिढ़ाती हुई गाती हैं। यहां पूरा गीत पारंपरिक शैली में जा रहा है……

एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला…

समधी जी आइले, सूट-बूट पहिन के बाराती लइके, ढोल-नगाड़ा बजइके एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला…

समधी के जूता चमकत बा कमाल हमार बहिनिया के घरवा सजावेला एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला…

बारातिया हंसत बाड़े, गारी सुन के समधी मुस्कुरावत बाड़े, शरमा के एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला…

समधी जी के बेटवा दुल्हा बन के आए हमार अंगना रोशन हो गइल, चांदिया चमके एहो समधी के कुर्ता कमाल करेला हमरे अंगना में पोछा के काम करेला…

(गीत आगे भी इसी तरह बढ़ता जाता है, जिसमें समधी, समधन और बारातियों पर हल्के-फुल्के मजाक किए जाते हैं। विवाह समारोह में महिलाएं इसे ताल पर गाकर नाचती हैं।)

यह गीत भोजपुरी संस्कृति की जीवंतता को दर्शाता है। शादी के माहौल को और भी रंगीन बनाने वाला यह गीत आज भी पूर्वांचल और बिहार के गांवों में बड़े चाव से गाया जाता है।

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